उत्तराखंड में भाजपा सरकार द्वारा सरकारी जमीनें निजी हाथों में सौंपने की तैयारी का कांग्रेस ने लगाया आरोप, ऋषिकेश में पत्रकार वार्ता कर कांग्रेस नेताओं ने यूआईआईडीबी के जरिए सरकारी संपत्तियों को लीज और पीपीपी पर देने पर उठाए सवाल
उत्तराखंड में भाजपा सरकार द्वारा सरकारी जमीनें निजी हाथों में सौंपने की तैयारी का कांग्रेस ने लगाया आरोप,
ऋषिकेश में पत्रकार वार्ता कर कांग्रेस नेताओं ने यूआईआईडीबी के जरिए सरकारी संपत्तियों को लीज और पीपीपी पर देने पर उठाए सवाल
ऋषिकेश, 16 सितंबर। उत्तराखंड सरकार पर सरकारी विभागों की बेशकीमती जमीन और संपत्तियों को निजी परियोजनाओं के लिए लीज एवं पीपीपी मॉडल पर देने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
ऋषिकेश में आयोजित पत्रकार वार्ता में नगर कांग्रेस अध्यक्ष ललित मोहन मिश्रा ने कहा कि उत्तराखंड निवेश एवं आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) के माध्यम से सरकारी संपत्तियों को निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार किया गया है।
इस मौके पर अन्य कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की नजर अब सरकारी विभागों की बहुमूल्य भूमि पर है। उन्होंने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र की करीब 142 एकड़ भूमि का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2023 में इसे निजी ऑपरेटर को 15 वर्ष के लिए करीब एक करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की कंसेशन फीस पर दिए जाने का निर्णय लिया गया। कांग्रेस ने इस मामले में भूमि के मूल्य और लीज शर्तों को लेकर भी सवाल उठाए। इस मामले में कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों की मीडिया रिपोर्टिंग भी हुई है।
कांग्रेसियों ने कहा कि वर्तमान में यूआईआईडीबी की ओर से नैनीताल के पटवाडांगर की करीब 14 एकड़ भूमि, हरिद्वार के अलकनंदा होटल और ऋषिकेश के लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन को लीज अथवा पीपीपी मॉडल पर देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सरकारी यूआईआईडीबी की वेबसाइट पर भी पटवाडांगर में प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी परियोजना के लिए भूमि आवंटन, अलकनंदा होटल के पुनर्विकास और ऋषिकेश पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के पुनर्विकास से संबंधित निविदाएं दर्ज हैं।
कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि इन निविदाओं में ऐसी पात्रता शर्तें रखी गई हैं, जिससे स्थानीय व्यक्ति अथवा छोटी कंपनियों के लिए भाग लेना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि एक ओर निविदाओं में भागीदारी के लिए कड़ी शर्तें हैं, वहीं दूसरी ओर संपत्तियों के उपयोग के एवज में भुगतान की व्यवस्था लंबी अवधि में करने का प्रावधान रखा जा रहा है।
पत्रकार वार्ता में कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि सरकारी जमीनों और संपत्तियों के संबंध में लिए जा रहे इन फैसलों से राज्य की बहुमूल्य संपत्तियां निजी क्षेत्र के पास जाने की आशंका है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों का उपयोग जनहित में होना चाहिए और किसी भी संपत्ति को निजी परियोजना के लिए देने से पहले उसकी पारदर्शिता, आर्थिक लाभ और स्थानीय हितों का स्पष्ट आकलन होना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने यूआईआईडीबी के गठन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सरकारी विभागों की जमीनों को लीज या पीपीपी पर देने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है और इससे राज्य को दीर्घकाल में कितना आर्थिक लाभ होगा। दूसरी ओर, सरकार की आधिकारिक वेबसाइट यूआईआईडीबी को 2023 के कानून के तहत गठित संस्था बताते हुए पीपीपी के माध्यम से बुनियादी ढांचा विकास और निवेश को बढ़ावा देने वाला बोर्ड बताती है।
कांग्रेस ने कहा कि सरकारी जमीन और संपत्तियों से जुड़े सभी फैसलों में पारदर्शिता बरती जानी चाहिए तथा स्थानीय हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। नेताओं ने कहा कि पार्टी इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाएगी और सरकारी संपत्तियों को लीज एवं पीपीपी पर दिए जाने की प्रक्रिया पर नजर रखेगी।
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेता विनय सारस्वत ,अरविंद जैन ,जयेंद्र रमोला ,राकेश सिंह मियां मौजूद थे।