ज्ञात रहे कि पिछले 5 वर्षों तक सामाजिक व राजनीतिक मंचों पर आयोजकों द्वारा एक दूसरे को अपने कार्यक्रमों में बुला लेना भी दोनों के लिए असमंजस की स्थिति पैदा कर देता था, यदि दोनों कार्यक्रमों में आ भी जाते थे। तो दोनों ही एक दूसरे का नाम लेना भी गंवारा नहीं समझते थे। दोनों ही आयोजकों से अपेक्षा रखते थे कि वह दोनों में से एक को पहले बुलाए और वह अपनी बात कह कर मंच तक छोड़ जाते थे। अब स्थिति यह बनी है कि ऋषिकेश नगर निगम के होने वाले संभावित चुनाव को देखते हुए दोनों एक साथ मंच साझा ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक साथ भोजन भी कर रहे हैं। जिसे देखकर कुछ रजनीति पंडितों को यह कहते सुना जा रहा है कि राजनीति ही एक ऐसी चीज है, की कब कौन किसका दुश्मन है और कौन मित्र,जिसे लेकर पार्टी के आम कार्यकर्ता व समर्थक असमंजस की स्थिति में आ गए हैं, जिनका मानना है कि यह सब भारतीय जनता पार्टी के हाई कमान के प्रयास से ही संभव हो पाया है, जिसका कारण आगामी नगर निगम के चुनाव का होना बताया जा रहा है।
वही इस संबंध में विधायक प्रेमचंद का कहना था कि उनके मन में कभी भी कोई राग द्वेष नहीं रहा है, परंतु कुछ लोगों द्वारा दोनों के बीच खाई खोदने का कार्य किया गया था। जिसे आपसी बातचीत से समाप्त कर लिया गया है अब दोनों ही पार्टी के लिए काम करेंगे।
वही दोनों को एक साथ मंच साझा करने पर अधिकांश पार्टी के कार्यकर्ताओं में हर्ष भी देखा जा रहा है। जिनका कहना था कि अब स्थानीय निगम के चुनाव में दोनों नेताओं के एक साथ आने पर पार्टी को लाभ मिलेगा।