![]()
अल्मोड़ा, 6 जून। जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच कृषि और किसानों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से हवालबाग में राज्य स्तरीय “खेत बचाओ अभियान” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि संरक्षण, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने तथा किसानों को भविष्य की चुनौतियों के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही मडुआ, झंगोरा, चौलाई सहित पारंपरिक मोटे अनाजों के संरक्षण एवं उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अल्मोड़ा की धरती पर किसानों के बीच आकर उन्हें नई ऊर्जा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि “खेत बचाओ अभियान” अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक जनांदोलन बन चुका है। मुख्यमंत्री ने किसानों से कृषि भूमि, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि देश की शक्ति और हिम्मत हैं। भारतीय संस्कृति में मिट्टी को मां के समान पूजनीय माना गया है, इसलिए इसकी उर्वरा शक्ति को बनाए रखना और खेतों को रासायनिक पदार्थों से यथासंभव मुक्त रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और सुरक्षित कृषि व्यवस्था छोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने बजट में 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। किसानों से नियमित रूप से मिट्टी परीक्षण कराने, जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप खेती अपनाने का आग्रह करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप फसल चयन करना समय की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि एक-दूसरे के पूरक हैं तथा इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए जल, जंगल, जमीन और प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों से प्रेरणा लेने की बात कही।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बागवानी, पॉलीहाउस, फलोत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, मेगा फूड पार्क और सुगंधित फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही मोटे अनाजों को भी विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ सीधे डीबीटी के माध्यम से दिया जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि किसानों की आय में वृद्धि के मामले में उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है, जो सरकार की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल वादों में नहीं, बल्कि धरातल पर कार्य करने में विश्वास रखती है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा जनपद में तारबाड़ योजना के अंतर्गत लगभग छह करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराए जाने की घोषणा भी की। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया तथा बड़ी संख्या में किसानों, महिला समूहों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने कृषि संरक्षण, मिट्टी संवर्धन एवं जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, मोहन सिंह मेहरा, महेश जीना, जिला पंचायत अध्यक्षा हेमा गैड़ा, मेयर अजय वर्मा, कृषि सचिव सुरेंद्र नारायण पांडे, जिलाधिकारी अंशुल सिंह, मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और किसान उपस्थित रहे।
