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ऋषिकेश 24 दिसंबर । विख्यात कथा वाचक गोपाल मणि ने गऊ को राष्ट्रीय पशु नहीं राष्ट्रीय माता का दर्जा दिए जाने की मांग की है।
यह मांग मंगलवार को गोपाल मणि ने ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर आयोजित कथा स्थल पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि
सनातन धर्म में वेद उपनिष कोद् पुराणों सहित समस्त धर्मशास्त्रों में गऊ की महिमा गाई गई है। गाय को पशु नहीं माता की प्रतिष्ठा दी गई है। यही सनातनधर्मी हिन्दुओं की पवित्र भावना है, आस्था है। इसी धार्मिक आस्था के चलते संविधान एवं कानून में गाय को राज्य सूची से हटाकर केन्द्रीय सूची में स्थापित कर गोमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने तथा गौहत्यामुक्त भारत बनाने के लिए सम्पूर्ण भारत में गौ प्रतिष्ठा आन्दोलन चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतन्त्रता प्रप्ति के पूर्व ही निरन्तर गौमाता की प्रतिष्ठा एवं रक्षा के प्रयास होते रहे हैं। 1966 ‘के धर्म सम्मत यतिचक्रचूडामणि करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में गौ आंदोलन है, जिसके लिए हजारों गौभक्तों का बलिदान हुआ था। इसी क्रम में गौमाता को राष्ट्रमाता ‘का सम्मान दिलाकर गोह्त्या
मुक्त भारत बनाने हेतु परम गोभक्त पूज्य गोपालमणि महाराज ने कई बार राज्यों की राजधानी से ‘लेकर देश की राजधानी तक लाखों गौभक्तों के साथ गौप्रतिष्ठा आन्दोलन का नेतृत्व ‘कर देश भर में इसे जीवन्त रखा, तथा इस पवित्र अभियान में चारों पीठों के जगद्गुरू शंकराचार्यो ‘का आशीर्वाद प्राप्त किया।
गोपाल मणि ने कहा कि चारों पीठों के जगदगुरू शंकराचार्यों द्वारा अभिषिंचित एवं समर्थित गौमाता ‘को राष्ट्रमाता ‘का सम्मान दिलाने एवं गौहत्या बन्दी कानून हेतु देश में गौ संसद का आयोजन हुआ जिसमें रामा प्रतिष्ठा संहिता बिल सहित 42 बिन्दू का धर्मसंदेश भी पारित किया जा चुका है। गौ प्रतिष्ठा ‘के इस अभियान ‘को प्रज्वलित ‘करने हेतु गौ घृत की ज्योति ‘को प्रकाशित कर ज्योर्तिमठ के जगद्गुरू शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द महाराज के पावन सानिध्य मे एवं गोपाल मणि महाराज इस आन्दोलन ‘का निर्देशन कर रहे हैं। जिन्होंने 14 मार्च से लेकर 28 मार्च 2024 तक नंगे पैर गोवर्धन से दिल्ली तक पदयात्रा भी की। जगदगुरू ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य के निर्देशन में गौ प्रतिष्ठा ‘का अभियान निरंतर देश भर में गतिमान है, जिन्होंने इस संवत्सर ‘को गौ संवत्सर के रूप में घोषित किया है।
गोपाल मणि ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने भारतीय गौमाता को राज्यमाता का संवैधानिक दजी दे दिया है। देवभूमि उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश के बाद अब महाराष्ट्रगौ को माता की प्रतिष्ठा देने वाला तीसरा राज्य बन गया है।
पत्रकार वार्ता में आचार्य सीता शरण, चंदना साधुका, अबल देती, राम सिंह पंवार, आचार्य राकेश सेमवाल, सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे।

