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ऋषिकेश ,24 अक्टूबर। वैदिक ब्राह्मण महासभा ने दीपावली पर्व को मनाए जाने संबंधी असमंजस की स्थिति को साफ करते हुए कहा कि दीपावली का पूजन 1 नवंबर को ही किया जाना शास्त्र सम्मत है।
दीपावली के पर्व को लेकर चल रहे अलग-अलग मतों पर वैदिक ब्राह्मण महासभा की बैठक सभा के कार्यालय जर्नादन आश्रम में आहुत की गई । जिसमें कहा गया कि दीपावली पर्व मनाने के संबंध में असमंजस की स्थिति बनी हुई है उसके निर्णय के साथ महासभा के अग्रिम क्रिया कलापों के विषय में भी चर्चाएं हुई।
बैठक में उपस्थित केशव स्वरूप ब्रह्मचारी के सानिध्य में महासभा के सदस्यों ने सर्व सम्मति से काशी विद्वत सभा, उत्तराखंड में प्रचलित पंचांगों तथा हमारे प्रमाणित धर्म ग्रंथों निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु,के आधार पर दीपावली पर्व 1 नवंबर 2024 को ही मनाना स्वीकार किया है। जोकि शास्त्र सम्मत है।
परदिने एव दिंद्वयेपि वा प्रदोषव्याप्तौ परा।
पूर्वत्रैव प्रदोषव्याप्तौ लक्ष्मीपूजनादौ पूर्वा। (धर्मसिंधु)
ब्राह्मण महासभा के संरक्षक केशव स्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि धर्म सिन्धु पुरुषार्थ चिंतामणि तिथि निर्णय व्रत पर्व विवेक आदि ग्रंथों में दिए हुए वचनों का विचार कर के दोनों दिन प्रदोष काल में अमावस्या की व्याप्ति कम या अधिक होने पर दूसरे दिन की अमावस्या के दिन लक्ष्मी पूजन करना शास्त्र सम्मत है।
महासभा के महामंत्री आचार्य शिव प्रसाद सेमवाल ने कहा प्रदोष काल में अमावस्या अल्पकाल होती है तब उस दिन सायंकाल ओर प्रदोष काल इन दोनों कालों में अमावस्या रहती हैं तथा अमावस्या ओर प्रतिपदा का युग्म होने से युग्म को महत्व देकर प्रतिपदा युक्त अमावस्या के दिन लक्ष्मी पूजन करना श्रेष्ठ है।
बैठक में निम्न सदस्य उपस्थित रहे
केशव स्वरूप ब्रह्मचारी
जगमोहन मिश्रा,शिव प्रसाद सेमवाल,सुरेश पंत, जगदीश जोशी,रामकृष्ण कोठियाल,केशव बहुगुणा,अमित कोठारी,सुनील भट्ट,मुकेश थपलियाल,अनुज ,राकेश,मोहितभट्ट आदि
उपस्थित थे।
