उन्होंने कहा कि दूसरी ओर मुख्यमंत्री कह रहे है इन्वेस्टरों ने जिस काम के लिए लिए जमीन ली है और उस पर कार्य नहीं किया गया है ।उसे सरकार में निहित किया जाएगा, जो की बहुत बड़ा धोखा है , जिससे बचने के लिए पूरे प्रदेश में शहर और गांव के लिए एक कानून बनाया जाए, उन्होंने मांग की है कि
हमारी मांग है कि यहां के लोग भूमिहीन न हो, और जो भी यहां उधोग धंधे लगाए जाएं उनमें यहां के मूल निवासियों की भागीदारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अन्य प्रदेशों से यहां आने वाले बड़ी संख्या में लोगों के कारण उत्तराखंड की राजनीतिक डेमोग्राफी भी बदल रही है। जिसके पति हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि हमारी मुख्य मांग जो जमीन फैक्लटरी लगाने के नाम पर आवंटित की गई है, उन्हें सरकार वापस ले। अगर हमारी जमीन नहीं बचेगी तो पहाड़ नहीं बचेगा जिसके लिए सभी को जागरूक रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि यह सरकार शराब माफिया, और भू माफिया के दबाव में काम कर रही है,
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में संघर्ष समिति द्वारा केदारनाथ अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ सहित प्रदेश के सभी शहरों में इससे बड़ी रैलियां करेगी।
पत्रकार वार्ता में संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी, एन पी रतूड़ी, सूरज जोगस, प्रांजल नौडियाल, हिमांशु रावत, बॉबी रायगढ़, उषा डोभाल आदि उपस्थित थे।