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ऋषिकेश 10 दिसंबर। मानव अधिकार रक्षा मंच ,अखिल भारतीय संत समिति व तमाम हिंदू संगठनों ने तीर्थ नगरी ऋषिकेश में बांग्लादेश में हो रहे अत्याचार और उनके संवैधानिक व अंतराष्ट्रीय अधिकारों के उल्लंघन के विरोध में जबरदस्त रैली निकाल कर अपना विरोध प्रकट करते हुए उप जिलाधिकारी के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया।
मंगलवार को भरत मंदिर इंटर कॉलेज के प्रांगण से मानव अधिकार रक्षा मंच के अध्यक्ष हरगोविंद तिवारी की अध्यक्षता व दीपक तायल के संचालन में अखिल भारतीय संघ समिति और हिंदूसंगठनों ने एक विशाल रैली निकाल कर अपना विरोध प्रकट किया, जोकि भरत मंदिर इंटर कॉलेज के प्रांगण से प्रारंभ होकर नगर के मुख्य बाजारों मार्गो से होती हुई त्रिवेणीघाट पर पहुंच कर समाप्त हुई, जहां उप जिलाधिकारी को भारत के राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी दिया गया, जिसमें मांग की गई कि भारत सरकार बांग्लादेश सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाए और सुनिश्चित करें कि संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के माध्यम से वह बांग्लादेश सरकार की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए, और यह भी सुनिश्चित करें कि भारत सरकार बांग्लादेश पर दबाव बनाकर अल्पसंख्यकों के विरुद्ध किए जा रहे हैं हमले में मारे गए अल्पसंख्यकों को निष्पक्ष रूप से न्याय दिलाए,
रैली के प्रारंभ होने से पूर्व अखिल भारतीय संत समिति के महामंडलेश्वर स्वामी दयाराम दास, महामंडलेश्वर हनुमंत पीठाधीश्वर डॉ रामेश्वर दास, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि, मधुबन आश्रम के महंत स्वामी परमानंद, महंत कपिल मुनि, व स्वामी चिदानंद मुनि ने उपस्थिति को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के लोगों को बांग्लादेश की स्थिति को देखते हुए एक होने की आवश्यकता है, यदि हिंदू बटेगा तो देश कटेगा जिसका ताजा उदाहरण पाकिस्तान और बांग्लादेश है, जहां बांग्लादेश अलग होने के बाद उन्हें भोजन करने वाले लोगों को ही काटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी शक्तियों के प्रभाव में आज बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं व उनके मंदिरों पर हमले कर मुस्लिम समाज के मंदिरों को तोडा़ जा रहा है, वही वही हिंदुओं की भी नीरस नृशंस हत्याएं की जा रही है। इस प्रकार की घटनाओं को देखकर यदि अभी भी हिन्दू नहीं जागा तो भारत में भी एक दिन बहुत संख्यक हिन्दु अल्पसंख्यक हो जाएगा, और उनकी भी भारत में हत्याएं की जाएगीं। इसलिए अभी हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है। इस अवसर पर केशव बह्मचारी, हृयगिरीवाचार्य, सहित व्यापारिक सामजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
